घड़ग्यों से गंगापुर सिटी तक का सफर !
#मैं_गंगापुर_सिटी_बोल_रहा_हूँ......😢😢😢
मैं गंगापुर दो शताब्दी से अधिक के काल खण्ड का साक्षी रहा हूँ।आज मेरा जो स्वरूप है - उसकी शुरूआत #घड़ग्यो नाम की एक छोटी सी ढाणी से हुई।सर्वप्रथम वैर-भुसावर के पास #सीते गाँव के बल्लू गुर्जर(पटेल)यहाँ आकर बसे।(आज भी पुरानी ट्रक यूनियन के पास गुर्जर मोहल्ले मे उनके वंशज निवास करते है।)कालान्तर मे मुझे #बारलावास के नाम से जाना जाने लगा।तत्पश्चात मैं जयपुर रियासत के"उदेई परगना"के अधीन आ गया ।जागीरदारी के रुप में हल्दिया बन्धुओं #कुशालीराम और #गंगासिंह को सौंप दिया गया।जिन्होने एक गढ़ का और उसके चारो तरफ"नहर"का निर्माण कार्य करवाया।(वर्तमान नहर रोड/कुशाल लेक)गंगा मन्दिर का निर्माण कार्य भी #हल्दिया बन्धुओं द्वारा किया गया।कुशालीराम के कारण 1मई 1783 को मेरा नाम #कुशालगढ़ रख दिया गया।समय के साथ साथ में आस पास के क्षेत्र का प्रमुख "व्यापारिक केन्द्र"बन गया और मैं कुशालगढ़ से #गंगापुर_सिटी (शायद प्राचीन "गंगा मंदिर के कारण)कब बन गया....पता ही नहीं चला।हमेशा से मैं गंगा-जमुनी तहजीब का शहर रहा हूँ।यहाँ की तेल मिलों,कृषि उपज मंडी एवं व्यापार ने मुझे न केवल प्रदेश बल्कि देश मे भी पहचान दिलाई है।जनसंख्या के लिहाज से मैं प्रदेश का #18वाँ बडा़ शहर हूँ।कभी "रेलवे की राजधानी"बना तो अब तालीम/शिक्षा का केन्द्र।जैसे जैसे मेरी आबादी बढी़ तो समस्याओं की पीडा़ भी पहाड़ होती गयी।आज मैं गंगापुर.......................🤔🤔🤔 अतिक्रमण,गन्दगी,पीने का पानी,साम्प्रदायिक दंगे/हिंसा, चोरी,लूट,डकैती जैसे अपराध, आशा अनुरुप विकास नही होना,असहिष्णुता आदि जख्मों के दर्दो से कराह रहा हूँ लेकिन इन पर मरहम लगाने वाले लोग कम और कुरेदने वाले ज्यादा दिख रहे हैं।वर्ष 2002 के #साम्प्रदायिक दंगों ने मेरी फि़जा में जहर घोलकर मेरी धरा को तीन बेगुनाहो के खून से रक्तरंजित किया।कुछ कथित कट्टरवादी संगठनों ने लोगों को धर्म के नाम पर लडा़कर मुझे "अतिसंवेदनशील शहर"का #तमगा दिलवा दिया।मैं खून के आँसू पीता रहा।समय समय पर कथित फर्जी राष्ट्रवादी संगठनों ,नेताओं द्वारा अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए साम्प्रदायिक सौहार्द को बिगाड़कर हमेशा मेरे #इतिहास में एक #काला_अध्याय जोड़ा।गत वर्ष भी 2अप्रैल को दलित संगठनों के"भारत बन्द आन्दोलन"के समय जातीय तनाव पैदा कर दिया गया।मैं मेरी पहचान यहाँ के प्रसिद्ध #खीरमोहन की मिठास एवं "शिक्षा के अग्रणी केन्द्र"के रूप में स्थापित करने की ओर बढ़ रहा हूँ ।लेकिन बीच बीच में चंद समाजकंटकों/अराजकतत्वों द्वारा धार्मिक तनाव रुपी गोलियों से मेरा #दामन छलनी कर दिया जाता हैं।मुझमें निवास करने वाले लोग ज्यादातर अमन चैन पसंद है।दिन भर मेरे आँचल में मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार के लिए दो वक्त के भोजन का इन्तजाम करने वाले हैं।लेकिन कुछ लोग राजनीतिक द्वैषता,महत्वाकांक्षा पूरी करने के लिए वर्षों से साथ साथ रहते आ रहे मेरे बच्चों को आपस में लडा़कर अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश में लगे हैं।ये सब देखकर मैं स्वंय #विचलित और व्यथित हो जाता हूँ।मैंने हाल ही 25अगस्त 2019 को हुऐ तनाव को भी नजदीक से देखा है.....लेकिन देश में नफरत ,वैमनस्यता फैलाने वाले कथित कट्टर संगठन अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो सके....और मैं साम्प्रदायिक दंगों की #आग में जलने से बच गया। काश....ये राजनेता मेरे बिगडे़ स्वरुप,सड़क,शुद्ध पेयजल,अतिक्रमण व अपराध आदि विषयों के समुचित समाधान की दिशा में काम करते तो मेरे सौन्दर्य,विकास में चार चाँद लगते।मैं स्वंय मेरे नाम से #शर्मिन्दा हूँ....मैं "गंगापुर"कम और #गंदापुर ज्यादा नजर आता हूँ।मैं आप सभी रहवासियों से आशा करता हूँ कि आप प्रेम और भाईचारें के साथ रहेंगे....और "कम्यूनल वायलेन्स"फैलाने वाली ताकतों का कन्धा से कन्धा मिलाकर मुकाबला करेंगे....मेरे दामन को आपस मे भाई भाई लड़कर रक्तरंजित नही करेंगे......🤔🤔🤔
आपका
⚫️ #गंगापुर_सिटी ⚫️
✒️✒️By :- Satish Lodwal
सतीश कुमार मीना
ग्राम पोस्ट-कोयला,तहसील-बामनवास
जिला-सवाई माधोपुर (राजस्थान)
322201
मैं गंगापुर दो शताब्दी से अधिक के काल खण्ड का साक्षी रहा हूँ।आज मेरा जो स्वरूप है - उसकी शुरूआत #घड़ग्यो नाम की एक छोटी सी ढाणी से हुई।सर्वप्रथम वैर-भुसावर के पास #सीते गाँव के बल्लू गुर्जर(पटेल)यहाँ आकर बसे।(आज भी पुरानी ट्रक यूनियन के पास गुर्जर मोहल्ले मे उनके वंशज निवास करते है।)कालान्तर मे मुझे #बारलावास के नाम से जाना जाने लगा।तत्पश्चात मैं जयपुर रियासत के"उदेई परगना"के अधीन आ गया ।जागीरदारी के रुप में हल्दिया बन्धुओं #कुशालीराम और #गंगासिंह को सौंप दिया गया।जिन्होने एक गढ़ का और उसके चारो तरफ"नहर"का निर्माण कार्य करवाया।(वर्तमान नहर रोड/कुशाल लेक)गंगा मन्दिर का निर्माण कार्य भी #हल्दिया बन्धुओं द्वारा किया गया।कुशालीराम के कारण 1मई 1783 को मेरा नाम #कुशालगढ़ रख दिया गया।समय के साथ साथ में आस पास के क्षेत्र का प्रमुख "व्यापारिक केन्द्र"बन गया और मैं कुशालगढ़ से #गंगापुर_सिटी (शायद प्राचीन "गंगा मंदिर के कारण)कब बन गया....पता ही नहीं चला।हमेशा से मैं गंगा-जमुनी तहजीब का शहर रहा हूँ।यहाँ की तेल मिलों,कृषि उपज मंडी एवं व्यापार ने मुझे न केवल प्रदेश बल्कि देश मे भी पहचान दिलाई है।जनसंख्या के लिहाज से मैं प्रदेश का #18वाँ बडा़ शहर हूँ।कभी "रेलवे की राजधानी"बना तो अब तालीम/शिक्षा का केन्द्र।जैसे जैसे मेरी आबादी बढी़ तो समस्याओं की पीडा़ भी पहाड़ होती गयी।आज मैं गंगापुर.......................🤔🤔🤔 अतिक्रमण,गन्दगी,पीने का पानी,साम्प्रदायिक दंगे/हिंसा, चोरी,लूट,डकैती जैसे अपराध, आशा अनुरुप विकास नही होना,असहिष्णुता आदि जख्मों के दर्दो से कराह रहा हूँ लेकिन इन पर मरहम लगाने वाले लोग कम और कुरेदने वाले ज्यादा दिख रहे हैं।वर्ष 2002 के #साम्प्रदायिक दंगों ने मेरी फि़जा में जहर घोलकर मेरी धरा को तीन बेगुनाहो के खून से रक्तरंजित किया।कुछ कथित कट्टरवादी संगठनों ने लोगों को धर्म के नाम पर लडा़कर मुझे "अतिसंवेदनशील शहर"का #तमगा दिलवा दिया।मैं खून के आँसू पीता रहा।समय समय पर कथित फर्जी राष्ट्रवादी संगठनों ,नेताओं द्वारा अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए साम्प्रदायिक सौहार्द को बिगाड़कर हमेशा मेरे #इतिहास में एक #काला_अध्याय जोड़ा।गत वर्ष भी 2अप्रैल को दलित संगठनों के"भारत बन्द आन्दोलन"के समय जातीय तनाव पैदा कर दिया गया।मैं मेरी पहचान यहाँ के प्रसिद्ध #खीरमोहन की मिठास एवं "शिक्षा के अग्रणी केन्द्र"के रूप में स्थापित करने की ओर बढ़ रहा हूँ ।लेकिन बीच बीच में चंद समाजकंटकों/अराजकतत्वों द्वारा धार्मिक तनाव रुपी गोलियों से मेरा #दामन छलनी कर दिया जाता हैं।मुझमें निवास करने वाले लोग ज्यादातर अमन चैन पसंद है।दिन भर मेरे आँचल में मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार के लिए दो वक्त के भोजन का इन्तजाम करने वाले हैं।लेकिन कुछ लोग राजनीतिक द्वैषता,महत्वाकांक्षा पूरी करने के लिए वर्षों से साथ साथ रहते आ रहे मेरे बच्चों को आपस में लडा़कर अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश में लगे हैं।ये सब देखकर मैं स्वंय #विचलित और व्यथित हो जाता हूँ।मैंने हाल ही 25अगस्त 2019 को हुऐ तनाव को भी नजदीक से देखा है.....लेकिन देश में नफरत ,वैमनस्यता फैलाने वाले कथित कट्टर संगठन अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो सके....और मैं साम्प्रदायिक दंगों की #आग में जलने से बच गया। काश....ये राजनेता मेरे बिगडे़ स्वरुप,सड़क,शुद्ध पेयजल,अतिक्रमण व अपराध आदि विषयों के समुचित समाधान की दिशा में काम करते तो मेरे सौन्दर्य,विकास में चार चाँद लगते।मैं स्वंय मेरे नाम से #शर्मिन्दा हूँ....मैं "गंगापुर"कम और #गंदापुर ज्यादा नजर आता हूँ।मैं आप सभी रहवासियों से आशा करता हूँ कि आप प्रेम और भाईचारें के साथ रहेंगे....और "कम्यूनल वायलेन्स"फैलाने वाली ताकतों का कन्धा से कन्धा मिलाकर मुकाबला करेंगे....मेरे दामन को आपस मे भाई भाई लड़कर रक्तरंजित नही करेंगे......🤔🤔🤔
आपका
⚫️ #गंगापुर_सिटी ⚫️
✒️✒️By :- Satish Lodwal
सतीश कुमार मीना
ग्राम पोस्ट-कोयला,तहसील-बामनवास
जिला-सवाई माधोपुर (राजस्थान)
322201

